Rajasthan Election 2023: आशु सिंह सुरपुरा का नाम राजस्थान में शायद ही किसी परिचय का मोहताज होगा। विधायक बनने से पहले ही लोगों के दिलों में जगह बनाना इतना आसान नहीं होता। भारतीय जनता पार्टी आलाकमान ने राजस्थान में टिकट वितरण किस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर दिया है, ये तो शायद उनकों भी अफ़सोस हो रहा होगा। भारतीय जनता पार्टी ने पहली ही लिस्ट में 7 सांसदों को विधानसभा चुनाव का टिकट दे दिया। विद्याधरनगर विधानसभा को छोड़कर एक भी सीट सुरक्षित नहीं लग रही।
झोटवाड़ा विधानसभा में टिकट वितरण सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत को किनारे रखकर सांसद राज्यवर्धन सिंह राठोड को मैदान में उतार दिया। भाजपा अगर पब्लिक के मन को टटोलती तो शायद आशु सिंह सुरपरा का नाम पहले नंबर पर आता। आशु सिंह 2013 में निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं और अच्छे खासे वोट लिए थे। 2019 में भाजपा आलाकमान का समर्थन किया और टिकट नहीं मिलने पर कोई चुनाव नहीं लड़ा।
आशु सिंह सुरपुरा के जिताऊ समीकरण
आशु सिंह सुरपुरा का क्रेज उस समय बढ़ा जब कोरोना में हर संभव मदद जनता तक पहुंचाई गई। हर जाति और सभी वर्गों के लोग उनके साथ कोरोना में बढ़ चढ़कर मदद का हाथ बढ़ा रहे थे। कोरोना के बाद लम्पी में भी आशु सिंह ने तहलका मचा दिया। झोटवाड़ा बहुत बड़ा विधानसभा क्षेत्र है, लेकिन इसमें भी एक फ़ोन पर जनता की सेवा में उपस्थित होना बहुत बड़ी बात है। तन, मन, धन से सेवा करने वाले जान नायक के सामने हजारों की भीड़ 13 अक्टूबर को एकत्रित हुई। भीड़ द्वारा भाजपा कार्यालय तक जाने का प्रोग्राम था, लेकिन 25 हजार से ऊपर की भीड़ को देखते हुए आशु सिंह ने गणेश जी के दर्शन करके ही सकुशल घर लौटने को कहा। भारी भीड़ के समर्थन के बाद कोई नहीं चाहता कि टिकट के लिए गिड़गिड़ाए।
भाजपा से नहीं कोई मतभेद
आशु सिंह सुरपुरा ने भरी भीड़ में मंच से कहा कि भाजपा से कोई मतभेद नहीं है। मनभेद है और वो भी विधानसभा चुनाव टिकट वितरण का। लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी मतों से जिताने की भी बात कही। टिकट वितरण किस तरीके से किया गया उसको लेकर विरोध सभी जगहों पर किया जा रहा है।
क्यों नहीं गए भाजपा कार्यालय
भारी समर्थन और बड़ी संख्या में लोगों का आना ही आशु सिंह सुरपुरा को हिम्मत दे रहा है। जब विधायक बनने के लिए जरुरी मत से ज्यादा की जनता साथ में हो तो कौन मगजमारी करेगा। 25000 के करीब पब्लिक से अगर नेता प्रति व्यक्ति 5 वोट की भी उम्मीद रखे तो जीत सुनिश्चित हो जाती है। जनता का समर्थन लेकर सीधे गणेश जी का आशीर्वाद लिया गया और सभी समर्थकों को बूथ मजबूत करने की अपील की गई।
राज्यवर्धन के पक्ष में नहीं झोटवाड़ा
सांसद राज्यवर्धन राठोड की साफ़ छवि और उनका काम झोटवाड़ा में काम नहीं आएगा। शाहपुरा और झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र ऐसी जगहें हैं जहाँ सबसे कम प्रवास हुआ है। विराट नगर और कोटपूतली होते तो शायद राज्यवर्धन सिंह को जनता जीत नवाज देती। झोटवाड़ा की जनता के बीच सांसद का नहीं पहुंचना भी उनके लिए चुनाव में माइनस पॉइंट है। झोटवाड़ा में राजपाल सिंह के विरोधी स्वर भी राज्यवर्धन सिंह को बैकफुट पर ला रहे हैं। Jaipur Jhotwara news
Leave a Reply